शाहजहांपुर के बंडा कस्बे से करीब सात किलोमीटर दूर गोमती नदी किनारे स्थित प्राचीन सुनासीरनाथ मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। यहां भगवान शिव, माता पार्वती व गणेश की प्रतिमा विराजमान हैं। मान्यता पूरी होने पर श्रद्धालु कद्दू चढ़ाते हैं। मंदिर के पुजारी रमेश गिरी ने बताया कि गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या से छल करने पर इंद्र को श्राप मिला था। श्राप से मुक्ति के लिए इंद्र ने गोमती नदी तट के किनारे सुनासीरनाथ धाम पर तपस्या की थी। उनका शरीर शून्य हो गया था तभी से इसे सुनासीरनाथ धाम कहा जाता है। मान्यता है कि सबसे पहले इंद्र यहां आकर शिव की पूजा अर्चना करते हैं। मुगल शासन में कड़े पहरे के बावजूद मंदिर में बेलपत्र चढ़ जाता था। इसके बाद मुगलों ने पूजा-अर्चना होने पर गाय कटवाने की धमकी दी। रमेश गिरी ने बताया कि इस पर भगवान शिव मंदिर से करीब 500 मीटर की दूरी पर गोमती नदी में चले गए। उसे आज पुरानी सुनासीरनाथ नाम से जाना जाता है। 1948 में मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले श्री श्री 1008 गौरी शंकर सीताराम ने नर्मदा नदी में बाल अवस्था में नग्न होकर तपस्या की थी। सुनासीरधाम पर प्रत्येक अमावस्या व पूर्णिमा को श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। पुत्र प्राप्ति के लिए लोग वहां कद्दू चढ़ाते हैं।