शाहजहांपुर में पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले मोहर्रम पर ताजियेदारी का सिलसिला शुरू हो गया है। सात मोहर्रम के मौके पर दिलाजाक स्थित इमामबाड़े में दीदार के लिए ताजिया रख दिया गया। ताजिए के दीदार के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे और फातिहाख्वानी कर अमन, खुशहाली व अपनी मन्नतों के लिए दुआएं मांगीं। इस बार इमामबाड़ा कमेटी ने गत वर्ष हुए विवाद को देखते हुए पैगी बनाने से इन्कार कर दिया है। हर वर्ष मोहर्रम के दौरान करीब 400 से 600 युवा पैगी बनकर मातम में शामिल होते थे, लेकिन इस बार यह परंपरा नजर नहीं आएगी। कमेटी के हनीफ शाह के अनुसार, पिछले वर्ष जुलूस के दौरान मारपीट की घटना हुई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पैगी नहीं बनाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से वर्षों पुरानी परंपरा टूटने की कगार पर पहुंच गई है, जबकि कई अकीदतमंदों ने इसे लेकर मायूसी भी जताई है। मोहर्रम के मद्देनजर इमामबाड़े और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है, ताकि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।