सोशल मीडिया पर हर समय ऑनलाइन रहने के साथ मोबाइल पर गेम और कार्टून देखने की जिद ने बच्चों और किशोरों को इंटरनेट के नशे की गिरफ्त में ला दिया है। शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज की मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना ही चार से पांच बच्चे किशोर आते हैं। क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ.रोहताश ईसा बताते हैं कि इंटरनेट लत के आदी बच्चों का उपचार व्यवहार चिकित्सा के जरिये करते हैं। इसमें दवा की आवश्यकता नहीं होती है। मनोचिकित्सा, काउंसलिंग के जरिये उनके मोबाइल की लत को दूर किया जाता है।