बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान सरकार से निजीकरण को वापस लेने की मांग की। संघर्ष समिति के पदाधिकारी मनीष मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण की प्रक्रिया व्यापक रूप से चलाई जा रही है। जिसका बिजली कर्मी विगत 11 महीनों से जोरदार विरोध कर रहे हैं। अब इन घटनाक्रमों से देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट होकर सामने आ गए हैं और वे निजीकरण का व्यापक विरोध करेंगे और राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया जाएगा। जिसका निर्णय आगामी 3 नवंबर को मुम्बई में होने वाली नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की मीटिंग में लिया जाएगा।