जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) उपाध्यक्ष के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से दाखिल चुनौती याचिका पर सोमवार को सुनवाई पूरी होने पर आरडीए अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने अगली तारीख निर्धारित की है। इस तारीख पर तय होगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के अधिवक्ता मोहम्मद जुनैद एजाज ने बताया कि सोमवार को करीब दो घंटे तक आरडीए अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त के न्यायालय में सुनवाई चली। यूनिवर्सिटी की तरफ से उन्होंने आरडीए के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि सींगनखेड़ा क्षेत्र में यूनिवर्सिटी की स्थापना के समय क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत अधिनियम लागू था। सींगनखेड़ा 27 सितंबर 2024 से आरडीए क्षेत्र में आया है। वहां पहले से बनी यूनिवर्सिटी पर आरडीए को कार्रवाई का अधिकार नहीं है। आरडीए के पास मास्टर प्लान, डेवलेपमेंट प्लान भी नहीं है, बॉयलाज व रेगुलेशन, मानक भी नहीं है। ऐसे में आरडीए किसी भवन को अवैध कैसे कह सकता है। वहीं, शासकीय अधिवक्ता दिनेश चौहान ने आरडीए का पक्ष मजबूती से रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने दोनों ही पक्षों को अपने दावों के समर्थन में एक सप्ताह में अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। साथ ही आगामी सुनवाई की तिथि 10 अगस्त तय की गई है। अधिवक्ता के मुताबिक जब तक आरडीए अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त के न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चलेगी, तब तक यूनिवर्सिटी के भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक रहेगी।