मेरठ। हस्तिनापुर की ऐतिहासिक नगरी की न्यू ब्लॉक कॉलोनी के शांति चौराहे पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में छठे दिन कथा वाचक ने भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि अपने भक्त पर संकट आने पर भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं। कस्बे की न्यू ब्लॉक में चल रही श्रीमद् भागवत कथा को सुनने के लिए शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथावाचक नीलांशु दास महाराज ने भरत चरित्र, नृसिंह भगवान अवतार और भक्त प्रहलाद की कथा सुनाई। जिसमें कहा कि भक्त पर संकट आने पर भगवान भक्त की रक्षा करने के लिए दौड़े चले आते हैं। भक्त के प्रति भगवान का स्नेह अपार होता है और भक्त पर ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है। ईश्वर अपने भक्तों पर सदा कृपा बनाए रखते है और उन्हें सुख समृद्धि प्रदान करता है। कथावाचक नीलांशु दास महाराज ने कथा में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाए मन तृप्त नहीं होता है। उन्होंने कहा कि हिरणकश्यप नामक दैत्य ने घोर तप किया, तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए व कहा कि मांगों जो मांगना है। यह सुनकर हिरनयाक्ष ने अपनी आंखें खोली और ब्रह्माजी को अपने समक्ष खड़ा देखकर कहा-प्रभु मुझे केवल यही वर चाहिए कि मैं न दिन में मरूं, न रात को, न अंदर, न बाहर, न कोई हथियार काट सके, न आग जला सके, न ही मैं पानी में डूबकर मरूं, सदैव जीवित रहूं। उन्होंने उसे वरदान दिया। हिरणकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरणकश्यप भागवत विष्णु को शत्रु मानते थे। उन्होंने अपने पुत्र को मारने के लिए तलवार उठाया था कि खंभा फट गया उस खंभे में से विष्णु भगवान नरसिंह का रूप धारण करके जिसका मुख शेर का व धड़ मनुष्य का था। प्रगट हुए भगवान नरसिंह अत्याचारी दैत्य हिरणकश्यप का वध किया। इस धार्मिक प्रसंग को आत्मसात करने के लिए भक्त देर रात तक भक्ति के सागर में गोते लगाते रहे। कथावाचक के मुख से भक्त प्रहलाद की कथा के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इसके साथ ही भजनों की प्रस्तुति ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इसके पूर्व कथा की शुरुआत रूपानंद महाराज द्वारा पहले वैदिक मंत्रोच्चार से की गई। इस अवसर पर नारायण नियोगी‚ डा. स्वदेश शर्मा‚ निकांत बाला‚ बबलू विश्वास‚ विकास गोलदार‚ रतन विश्वास‚ प्रतीश शर्मा‚ सुभाष मालाकार‚ कृष्ण कीर्तनीय‚ अमित सरकार, तरुण सरकार आदि का सहयोग रहा।