आर्य समाज थापर नगर मे रविवारीय सत्संग में "वैदिक कर्म फल सिद्धांत'' पर आर्य समाज के प्रधान राजेश सेठी ने विचार रखे। कहा कि मनुष्य अपने मन, इन्द्रियों एवं शरीर से जो भी चेष्टाएं करता है, वह कर्म कहलाती हैं। परंतु इन चेष्टाएं के लिए मनुष्य का स्वतंत्र कर्ता होना आवश्यक है। यद्यपि जैसी करनी वैसी भरनी यह सर्वमान्य सिद्धांत है। हमारे कर्म ही हमारे भविष्य का आधार हैं। महिलाओं ने भजन गाए।