अच्छे वेतन की चाह में गए भारतीय युवकों को रूस-यूक्रेन युद्ध में झोंक रहा है। इसकी बानगी है आजमगढ़ निवासी कन्हैया यादव। जिनकी दिसंबर की पहले सप्ताह में मौत हो गई। इसकी पुष्टि कन्हैया के छोटे बेटे विजय ने की। कन्हैया की तरह ही आजमगढ़ और मऊ के 14 युवकों को सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के नाम पर रूस भेजा गया था। इसमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। एक लापता है। बाकी वहां फंसे हैं।