जब दुनिया भर की चिकित्सा निराशा दे देती है, उनके लिए विश्वास हर साल राधाकुंड के जल में उमड़ता है। जब निसंतान दंपति पूरी दुनिया की चिकित्सा से निराश होकर जलस्वरूपा राधारानी के दरबार में आशा का आंचल फैलाते हैं, तब मातृत्व सुख राधारानी की कृपा का अहसास कराता है। सोमवार की मध्यरात्रि को राधाकुंड में होने वाला स्नान केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि विश्वास की कथा बन चुका है। अहोई अष्टमी की रात 12 बजे राधाकुंड पर श्रद्धा का सागर उमड़ पड़ता है। आंखों में संतान की कामना और होंठों पर एक ही पुकार। हे राधारानी हमारी सूनी गोद भी भर दो। देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु इस रात राधाकुंड पहुंचते हैं। अमेरिका, इंग्लैंड, रूस और नेपाल से आए कई दंपति यहां जल में स्नान कर मातृत्व सुख की कामना करते देखे गए। मान्यता है कि राधाकुंड में अहोई अष्टमी की रात स्नान करने वाले निसंतान दंपतियों को राधारानी की कृपा से संतान प्राप्त होती है।