उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के छाता में बाबा चंद्रशेखर उर्फ 'फरसा वाले बाबा' की मौत के बाद शनिवार सुबह लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ ने दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर पुलिस पर पथराव किया, जिससे दहशत का माहौल बन गया। पथराव में पुलिस की गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं। हालात पर काबू पाने के लिए सेना की टुकड़ी ने मोर्चा संभाला है। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। बाबा चंद्रशेखर मूल रूप से फिरोजाबाद के गांव गोपाल का नगला के रहने वाले थे, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह भी इसी गांव से आते हैं। गोरक्षा में फरसा लेकर बाबा चंद्रशेखर ने 'फरसा वाले बाबा' के रूप में अपनी पहचान बनाई। गांव-गांव गो-सेवकों की टीम गठित की। करीब 200 युवाओं की टीम है, जो गोसेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती है। बाकी बड़ी संख्या में भक्त थे। बाबा के भाई ने बताया कि बाबा चंद्रशेखर 10 साल की उम्र में संत बन गए थे। माता-पिता की मौत के बाद घर छोड़ दिया था, फिर संत हो गए। उसके बाद आयोध्या गए। श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। 20 साल तक वहां रहे, उसके बाद ब्रज में आ गए थे। यहां गोसेवा का संकल्प लिया और गोशाला चला रहे थे।