सावन के पवित्र महीने में भोलेनाथ के मंदिरों में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। शिव भक्त भोलेनाथ को जल अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगेंगे। जिले में कुछ ऐसे मंदिर भी है जिनका इतिहास काफी पुराना है। शहर में ऐसा ही एक मंदिर स्थित है जिसे लोग चांदेश्वर महादेव के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में हुई थी। अज्ञातवास के दौरान पांडव और हस्तिनापुर के महामंत्री महात्मा विदुर यहां आए थे और उन्होंने कड़ी साधना व तपस्या की थी। उन्होंने ही इस मंदिर की स्थापना की थी। इसके बाद से यह मंदिर यहां पर मौजूद है। कहा जाता है कि इस मंदिर के नाम का भी एक अलग इतिहास है। लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर की शिवलिंग रात्रि में चंद्रमा की तरह चमकती थी, इसीलिए इसका नाम चांदेश्वर महादेव मंदिर रखा गया। सावन के पवित्र महीने में यहां हर सोमवार को करीब 20 से 25 कांवड़िया जल अर्पित करने के लिए आते हैं। भोलेनाथ से वह जो भी मनोकामना मांगते हैं वह अवश्य पूरी होती है। कल सोमवार को यहां पर भारी संख्या में भक्तों की भीड़ और कावड़िया भोलेनाथ की आराधना करने के लिए आएंगे।