लखीमपुर खीरी के फूलबेहड़ क्षेत्र में पिछले साल शारदा नदी ने तबाही मचाई। नदी के कटान में अहिराना गांव का वजूद ही खत्म हो गया। इस गांव के लोगों ने अपना मकान, जमीन गंवाई लेकिन पिछले साल कुछ राहत सामग्री के सिवा कुछ नहीं मिला। अहिराना गांव के पीड़ितों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। कटान पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्रीय विधायक और सांसद आदि जनप्रतिनिधियों ने भी इन्हें वोटबैंक से ज्यादा कुछ नहीं समझा। पिछले साल शारदा नदी में आई बाढ़ की वजह से अहिराना गांव तबाह हो गया। तबाही का दंश झेलते हुए इन ग्रामीणों को एक वर्ष गुजर गया। इस साल भी शारदा नदी के कटान कर रही है, लेकिन अहिराना गांव के पीड़ितों को प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल सकी है। करीब 20 से ज्यादा कटान पीड़ित खानाबदोश जिंदगी जी रहे हैं। मजदूरी कर गुजर-बसर कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई तक छूट गई है। अहिराना की संजू बताती हैं कि एक साल बीत गया, लेकिन प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। रामवती का भी यही दर्द है। इनका घर भी पिछले वर्ष नदी में कट गया था। रामवती ने कहा कि मेहनत मजदूरी कर जिंदगी गुजर बस रही हैं।