विरोधी गुट का एक ऐसा व्यक्ति जिसे मैं जानता तक नहीं उसने मेरी प्रत्याशिता रद्द कराने के लिए याचिका दाखिल की थी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अगर मैं यूपी बार काउंसिल का चुनाव जीता तो कार्य बहिष्कार के अधिवक्ताओं के मौलिक अधिकार के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन करूंगा। यह विचार यूपी बार काउंसिल चुनाव में सदस्य पद के प्रत्याशी और बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व महामंत्री नरेश चंद्र त्रिपाठी ने पत्रकार वार्ता में रखे। उन्होंने बताया कि सिविल लाइंस निवासी फखरुद्दीन अली अहमद ने उनके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा था कि नरेश चंद्र त्रिपाठी कट्टा गुरु कहलाते हैं। हाईकोर्ट ने एक अवमानना याचिका में उन्हें सजा सुनाई है इसलिए उनका नामांकन रद्द किया जाए। हाईकोर्ट ने माना कि याचिका में दोषसिद्धि नहीं की गई है सिर्फ आरोप तय हुए हैं। न्यायिक कार्यवाही अभी लंबित हैं। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने याचिका को निराधार मानते हुए उसे खारिज कर दिया है। नरेश ने अपने अध्यक्ष व महामंत्री के कार्यकाल के दौरान अधिवक्ता हितों के लिए किए गए संघर्षों को बताते हुए यूपी बार काउंसिल चुनाव का अपना 15 सूत्रीय घोषणा पत्र भी जारी किया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीते तो सबसे पहले अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने की पाबंदी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करके इसे तत्काल हटवाया जाएगा। वार्ता में नरेश मिश्रा, सियाराम पाल, शशिकांत तिवारी भी मौजूद रहे।