धर्म को समझना है तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र को समझना जरूरी है। यदि धर्म शरीर धारण कर ले तो वह प्रभु राम जैसा होगा। ये विचार मंगलवार को स्वामी प्रबुद्धानंद ने व्यक्त किए। वह सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में चिन्मय मिशन की ओर से आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के पांचवें दिन बोल रहे थे। यह आयोजन चांडक परिवार करा रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, दूसरी ओर श्रीकृष्ण 16 कलाओं में निपुण और ऐश्वर्य धारी हैं। भगवान राम धर्म की सरल व्याख्या हैं, तो श्रीकृष्ण की जटिल धर्म व्याख्या है। उन्होंने नारायण कवच वर्णन, प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार, समुद्र मंथन, कच्छप व रोहिणी अवतार के बारे में बताया। कार्यक्रम में चिन्मय परिवार के अलावा नीरज, विभोर, घनश्याम, ज्ञान, मनोज आदि मौजूद रहे।