वर्तमान में यूजीसी पर चल रहे घमासान के बीच सरसौल क्षेत्र के वरिष्ठ कवि धीरपाल सिंह धीर ने अपनी व्यंग्यात्मक कविता के माध्यम से सरकार की नीतियों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश में यूजीसी बिल लागू किया जा रहा है यदि उसी तरह का बिल जंगलों में लागू हो जाए तो वहां की स्थिति कैसी होगी यह सोचना भी विचित्र है। कवि ने सवर्णों के लिए यूजीसी बिल को व्यंग्य के माध्यम से अत्याचार बताया और कहा कि.. जिंदगी में शीघ्र ऐसा एक दौर भी आएगा, जब शेर भी लाचारी में चूहा बनकर बस रह जाएगा, " भेड़ बकरी और बंदर, शेर पर गुर्राएंगे और शियार की जय बोल सिंहासन पर बिठाया जाएगा।