1 जनवरी की पूर्व संध्या पर मंदिरों में भजन-कीर्तन के आयोजन की आध्यात्मिक परंपरा ग्रामीणांचल में आज भी देखने को मिलती है। नव वर्ष के स्वागत में भीतरगांव कस्बे के मंदिर में ग्रामीण भजन कीर्तन में देर रात तक ईश्वर के समक्ष बैठते हैं। आधी रात जब घड़ी की सुइयां ठीक 12 बजा रही होंगी उस समय नए वर्ष का स्वागत मंदिरों से शंख व घंटों की आवाज की सकारात्मक ऊर्जा के साथ ग्रामीण करते हैं।