सरकारी फाइलों में माइनर की 'सफाई' और 'रखरखाव' के नाम पर हर साल लाखों रुपये का वारा-न्यारा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि भीतरगांव ब्लॉक के मुरलीपुर से उमरी गांव जाने वाली माइनर पिछले दो दशकों से सूखी पड़ी है। 20 वर्षों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस माइनर में पानी नहीं पहुंचा, जिससे क्षेत्र के किसानों की उम्मीदें दम तोड़ रही हैं।