कानपुर देहात के चिरला-अखरी मार्ग पर वन विभाग के पौधारोपण अभियान की हकीकत अब सड़क किनारे साफ दिखाई देने लगी है। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के दावे करने वाला विभाग लगाए गए पौधों की देखरेख करना ही भूल गया, जिसके चलते सैकड़ों पौधे एक साल के भीतर सूखकर खत्म हो गए। बीते वर्ष सरसौल और भीतरगांव ब्लॉक को जोड़ने वाली पांडु नदी के दोनों किनारों पर बड़े स्तर पर पौधारोपण कराया गया था। विभाग ने पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड भी लगाए थे और इसे पर्यावरण संरक्षण की बड़ी पहल बताया गया था। हालांकि पौधारोपण के बाद इन पौधों की न तो नियमित सिंचाई कराई गई और न ही उनकी निगरानी हुई। भीषण गर्मी और पानी की कमी के कारण धीरे-धीरे सभी पौधे सूख गए। अब सड़क किनारे सिर्फ खाली ट्री गार्ड खड़े दिखाई दे रहे हैं, जो विभागीय लापरवाही और सरकारी धन की बर्बादी की कहानी बयां कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में बड़े उत्साह के साथ पौधे लगाए गए थे, लेकिन बाद में किसी अधिकारी या कर्मचारी ने उनकी सुध नहीं ली। लोगों का आरोप है कि हर साल पौधारोपण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर नतीजे नजर नहीं आते।