कानपुर के कैलाश मंदिर (शिवाला) परिसर में स्थित 200 साल से अधिक पुराना रावण (दशानन) मंदिर साल में केवल एक दिन विजयादशमी (दशहरा) के अवसर पर प्रातःकाल से शाम तक के लिए खुलता है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दशानन को कड़वे तेल का दीपक, तरोई के पीले फूल और जनेऊ के साथ पुष्प अर्पित करते हैं। पुजारी राम बाजपेई के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा रावण को मुख्य रूप से तीन चीजें अर्पित कर अपने परिवार व बच्चों के लिए विद्या, बुद्धि और बल की कामना की जाती है। रावण को पीला रंग और विशेष रूप से सोना (गोल्ड) अति प्रिय होने के कारण उन्हें पीली सामग्री अर्पित की जाती है। कभी इस कैलाश मंदिर परिसर में रामलीला भी आयोजित होती थी, जहां भगवान शिव का विशाल शिवलिंग स्थापित है। दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने 'जय लंकेश' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे लगाए।