शिवराजपुर के धिमऊ स्थित कंपोजिट विद्यालय की शिक्षिका रूपांजली बच्चों को नई सोच और रचनात्मकता से जोड़ने के लिए लगातार नवाचार कर रही हैं। 2010 में विद्यालय की जिम्मेदारी संभालते समय सिर्फ 37 बच्चे थे। आज संख्या 196 पर पहुंच गई है। उन्होंने मात्रा कविता तैयार कर बच्चों में भाषा की समझ विकसित की जिसे जनपद स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिला। रंगोली व अन्य कार्यक्रमों से भी बच्चों ने कई बार पुरस्कार जीते। विद्यालय के बच्चे लगातार जनपद और राज्य स्तर पर सम्मानित हो रहे हैं। रूपांजली को शिक्षक दिवस पर दो बार बीएसए सम्मानित कर चुके हैं। वह बतातीं हैं कि गरीब बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना और उनका पूर्ण विकास करना ही संकल्प है।