रामलीला का मंचन सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि इसके पीछे कलाकारों के संघर्ष और जज्बे की अनूठी कहानी छिपी है। मंच पर प्रभु का रूप धारण करने वाले ये कलाकार जब पर्दा गिरता है तो अपनी सामान्य जिंदगी में लौट आते हैं, जहां उनका जीवन आम इंसानों की तरह ही होता है। रामलीला में राम का किरदार निभाने वाले कलाकार की एक नमकीन एजेंसी है, जिससे वह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वहीं, लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले पंडित एक जोकर फैक्टरी में काम करते हैं। मंच पर देव ऋषि नारद का अभिनय करने वाले कलाकार पेशे से किसान हैं और रासलीला में नृत्य करने वाली महिला डीजे पर डांस करती है। इनमें से कुछ कलाकार अपनी आस्था और शौक के लिए प्रभु की सेवा करते हुए रामलीला में भाग लेते हैं, जबकि कुछ ऐसे भी हैं जिनकी मजबूरियां उन्हें मंचन के लिए प्रेरित करती हैं। इन सभी कलाकारों का समर्पण यह साबित करता है कि आस्था और कला का संगम कैसे लोगों को एकजुट कर सकता है।