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जुगाड़: गंगा के पुल पर लकड़ी की सीढ़ी लगाकर सीमा पार कर रहे ग्रामीण

बीते साल के अगस्त–सितंबर माह में आई गंगा की बाढ़ ने जहां कई गांवों की तस्वीर बदल दी वहीं नरवल के डोमनपुर और उन्नाव के गढ़ेवा गांव को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग पूरी तरह तबाह हो गया था। गंगा की तेज धारा और कटान से सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच सीधा संपर्क टूट गया था। बाढ़ का पानी उतरने के महीनों बाद भी मार्ग का पुनर्निर्माण न होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग अपनी जान से खिलवाड़ करते हुए गंगा पार करने के लिए तरह तरह के पैंतरे आजमा रहे है। आवागमन ठप हो जाने के कारण ग्रामीणों को करीब दस किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए अब सत्तर किलोमीटर तक का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है बल्कि अतिरिक्त किराया भी देना पड़ रहा है।रोजाना कामकाज स्कूल कॉलेज और बाजार जाने वाले लोगों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो गई है। प्रशासनिक उदासीनता के बीच ग्रामीणों ने मजबूरी में जुगाड़ का रास्ता अपनाया है। गंगा पुल पर चढ़ने के लिए लकड़ी की अस्थायी सीढ़ी लगा दी गई है। जिसके सहारे लोग जान जोखिम में डालकर पुल पर चढ़ उतर रहे हैं। यह सीढ़ी न तो सुरक्षित है और न ही किसी मानक के अनुरूप फिर भी बच्चों बुजुर्गों और महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोग इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इस अस्थायी व्यवस्था के चलते हादसे होने की आशंका बनी रहती है लेकिन मजबूरी में उन्हें इसी रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही ने इस संकट को और गहरा कर दिया है जिससे ग्रामीणों का धैर्य अब टूटने लगा है।

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