कोर्ट रूम में एक ओर कुशाग्र के मां-बाप, चाचा-बाबा व अन्य परिजन थे वहीं, दूसरी ओर कटघरे में रचिता, प्रभात और शिवा मौजूद थे। वकीलों से खचाखच भरी कोर्ट और बाहर मीडियाकर्मियों का जमावड़ा था। कुछ ऐसे ही माहौल में गुरुवार को कोर्ट ने कुशाग्र हत्याकांड पर फैसला सुनाया। कोर्ट की पूरी कार्यवाही में लगभग डेढ़ घंटे लगे। अभियोजन और बचाव पक्ष सुबह कोर्ट पहुंचा तो न्यायाधीश ने सजा पर सुनवाई के लिए दोपहर दो बजे का समय दिया। दोपहर दो बजे दोषियों को कटघरे में लाया गया और कुशाग्र के मां-बाप समेत अन्य परिजन भी पहुंचे। अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के साथ-साथ सजा सुनने की उत्सुकता लिए अधिवक्ताओं की भीड़ भी कोर्ट में मौजूद रही। माहौल तब गमगीन हो गया जब कुशाग्र के माता-पिता और चाचा ने अपना दर्द बयां किया। कटघरे में खड़े हत्यारों से उनका पक्ष जाना गया तो रचिता, प्रभात और शिवा पछतावे के साथ कोर्ट से रहम की भीख मांगने लगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश सजा पर फैसला लिखने के लिए चले गए और लगभग सवा तीन बजे वापस लौटकर फैसला सुनाया। पूरी कार्यवाही में डेढ़ घंटे का वक्त लगा। इस दौरान पीडि़तों और हत्यारों दोनों के लिए एक-एक पल काटना भारी था।