काशी बदली, अयोध्या बदली अब बिठूर की बारी है, राम खड़े हैं लिए धनुष, अब बंशी बजने वाली है... भजन से अनूप जलोटा ने तीन दिवसीय बिठूर महोत्सव की शुरुआत की। विभिन्न प्रदेशों से आए कलाकारों ने 1857 के क्रांति की गवाह बिठूर की धरती पर सांस्कृतिक और आजादी के संघर्षों पर आधारित नृत्य एवं नाटक पेश करके सबका मन मोहा। मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बिठूर की धरती चंदन की धरती है। यह धरती, देश की आजादी की साक्षी है।