सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। सरसौल कस्बे में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय द्वितीय की हालत बेहद बदतर है, जबकि इस विद्यालय से महज 50 मीटर की दूरी पर खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय और 200 मीटर की दूरी पर सरसौल ब्लॉक कार्यालय है, जहां विकास खंड अधिकारी खुद मौजूद रहते हैं। विद्यालय का निरीक्षण करने पर सुविधाओं के नाम पर सब कुछ शून्य मिला। बच्चों के लिए पीने के पानी की सही व्यवस्था नहीं है। शौचालय गंदगी से भरे पड़े हैं, जिसके कारण स्कूली बच्चे खुले में लघुशंका करने को मजबूर हैं। आंगनवाड़ी में बने शौचालय पर ताला लटका मिला,आंगनवाड़ी कार्यकर्त्री मंजू सिंह ने बताया कि बिजली और पानी की व्यवस्था न होने के कारण शौचालय में ताला लगा रहता है वहीं दिव्यांग बच्चों के लिए बनाए गए विशेष शौचालय में भी ताला बंद मिला। विद्यालय परिसर के आसपास सफाई न होने से झाड़ियां उग आई हैं और पूरा विद्यालय जंगल में तब्दील होता नजर आ रहा है। अधिकारियों के इतने करीब होने के बावजूद विद्यालय की यह दुर्दशा विभागीय लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। वही विद्यालय के प्रधानाध्यापक विजय श्रीवास्तव ने बताया कि तीन दिन दशहरे की छुट्टी रही इसी में सफाई कर्मी विद्यालय नहीं आया था शौचालय की साफ सफाई प्रतिदिन कराई जाती है वहीं दिव्यांग शौचालय में सफाई करने के बाद ताला लगा दिया जाता है ताकि अन्य बच्चे गंदा ना करें।