चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो, तेरी बिंदिया रे आय हाय, दीवाना हुआ बादल, बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है... आदि गीत गाकर मोहम्मद रफी के पुत्र शाहिद ने लाजपत भवन में लोगों की रविवार की शाम यादगार बना दी। संगीतमयी संध्या का आयोजन दिवंगत व्यापारी व समाजसेवी सरदार गुरजिंदर सिंह सलूजा की स्मृति में महबूब इंटरनेशनल म्यूजिकल ग्रुप और अमर उजाला के सहयोग से गोल्डन हार्मनी म्यूजिकल मैलोडी की ओर से किया गया। मंच पर सिर्फ शाहिद रफी ही नहीं देश के कई जाने-माने कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। इसमें सारेगामा और इंडियन आइडल से देश भर में पहचान बनाने वाले गायक गिरीश बिस्वा ने अपनी जादुई आवाज से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा, दिन ढल जाए हाय रात ना जाए, टूटे हुए ख्वाबों ने हमको ये सिखाया है, बाबुल की दुआएं लेती जा जा तुझको सुखी संसार मिले, याद ना जाए बीते दिनों की जैसे गाने गाकर खूब तालियां बटोरीं। मुंबई से आए वायलिन विशेषज्ञ जीतू ठाकुर की धुन ने हर किसी का दिल जीत लिया। मोहम्मद रफी की आवाज के प्रतिरूप के रूप में प्रसिद्ध प्रसन्न राव ने मो. रफी के दौर को जीवंत कर दिया। महबूब इंटरनेशनल के शहर के स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी बेहतरीन कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही लूटी। संगीत संध्या में मोहम्मद रफी के साथ-साथ स्वर कोकिला लता मंगेशकर और आशा भोसले के भी कई सदाबहार गीत प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी, नई दिल्ली के प्रसिद्ध उद्घोषक नरेश खन्ना ने किया। उन्होंने अपनी मखमली आवाज और शेरो-शायरी से देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा।