समय के साथ महिलाओं की सोच और जरूरतें भी बदल रही हैं। अब वे घर की चौखट तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा, नौकरी, स्वरोजगार और अपने दैनिक कार्यों के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। इसी बदलाव की तस्वीर हाथरस में भी देखने को मिल रही है, जहां बड़ी संख्या में छात्राएं, गृहिणियां और कामकाजी महिलाएं स्कूटी चलाना सीख रही हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ने के साथ ही रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भरता भी कम हो रही है।