चक्की की चर्र-चर्र, सिल-बट्टे पर पिसती मिर्च-लहसुन की खुशबू और खटिया पर बैठी सखियों की हंसी... कुछ देर के लिए लगा जैसे शहर की चकाचौंध पीछे छूट गई और गांव की वही पुरानी चौपाल लौट आई है। हरियाली तीज पर रामोजी रिजॉर्ट में कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दिया। महिलाओं ने गांव की गोरी, एक मीठी सी याद थीम के बहाने सिर्फ ग्रामीण वेशभूषा नहीं अपनाई, बल्कि बचपन में देखे और जिए गांव को फिर से महसूस किया।