पशुओं को गलघोटू जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने जून-जुलाई में 45 दिन तक घर-घर टीकाकरण अभियान चलाया। विभाग का दावा है कि एचएस (हैमरेजिक सेप्टीसीमिया) वैक्सीन के लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत टीकाकरण हुआ है। गांवों में पड़ताल में दावा उलट मिला। कई पशुपालकों ने बताया कि उनके गांव में टीम पहुंची ही नहीं। कुछ गांवों में वर्षों से टीकाकरण नहीं हुआ। भैंस और बछिया की मौत, टीम नहीं पहुंची कटरा बाजार के रामापुर निवासी वेद प्रकाश ने बताया कि 24 जून को करीब 1.20 लाख रुपये की भैंस की मौत हो गई। रविवार सुबह एक साल की बछिया भी मर गई। दोनों को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई थी। उनका कहना है कि गांव में टीकाकरण टीम नहीं आई। ननके, रामकृपाल और जमुना ने भी टीकाकरण नहीं होने की बात कही। तीन साल से नहीं आया दल परसपुर के कंजेमऊ के फुलवारी मजरे के संजय कुमार वर्मा ने बताया कि तीन साल से गांव में टीकाकरण टीम नहीं आई। उनके पास दो गाय और दो भैंस हैं। आरती वर्मा ने बताया कि पशु सखी का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने कई बार टीकाकरण के लिए डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन सहयोग नहीं मिला। 12 पशु, एक को भी नहीं लगा टीका नवाबगंज के रामापुर निवासी राम बिहारी ने बताया कि उनके पास करीब 12 गाय-भैंस हैं, लेकिन टीकाकरण के लिए कभी कोई नहीं आया। परमजीत दूबे ने बताया कि उनके पास 15 से अधिक पशु हैं। पिछली बार निजी कर्मी ने टीका लगाया था, इस बार टीम नहीं आई। निशुल्क टीके के लिए 10 रुपये लेने का आरोप खरगूपुर के भंगहा गांव में राजमणि विश्वकर्मा, प्रेमलाल गोस्वामी और रामकुमार विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि करीब 15 दिन पहले भैंसों के टीकाकरण के बदले प्रति पशु 10 रुपये लिए गए। पारसनाथ सोनकर, जगतराम वर्मा और राम अवतार ने बताया कि उनके पशुओं को अब तक टीका नहीं लगा। कई पशुओं के कान में टैग भी नहीं लगाए गए। मुजेहना के लखनीपुर में जाकिर अली और विश्वनाथ यादव ने भी टीम के नहीं पहुंचने की बात कही। जिले में 5.53 लाख गाय-भैंस गाय : 2.01 लाख भैंस : 3.52 लाख एचएस टीकाकरण लक्ष्य : 4.88 लाख विभाग का दावा : लक्ष्य के सापेक्ष 100 फीसदी टीकाकरण सात माह से अधिक गर्भवती और चार माह से कम उम्र के पशुओं को टीका नहीं लगाया जाता विभाग का दावा- लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत टीकाकरण टीकाकरण के नोडल अधिकारी डॉ. निशांत कुमार यादव ने कहा कि सात माह से अधिक गर्भवती और चार माह से कम उम्र के पशुओं का टीकाकरण नहीं किया जाता। लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत टीकाकरण कराया गया है। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. शशि कुमार शर्मा से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। सवाल सुनने के बाद उन्होंने फोन काट दिया। दोबारा फोन रिसीव नहीं किया। कागजों में पूरा, गांवों में सवाल विभाग शत-प्रतिशत टीकाकरण का दावा कर रहा है, जबकि कई गांवों के पशुपालक टीम के नहीं पहुंचने की बात कह रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि लक्ष्य पूरा होने के बावजूद इन गांवों के पशु टीकाकरण से कैसे छूट गए? बीमारी फैलने पर इसका सीधा असर पशुपालकों की आजीविका पर पड़ सकता है।