जब अधिकांश बच्चे आठ साल की उम्र में परिवार की छांव में खेलते-कूदते हैं, तब गोंडा के लक्ष्य रायचंदानी ने अपने सपनों की खातिर घर छोड़ दिया था। हाथ में बैट, आंखों में भारत की नीली जर्सी पहनने का सपना और दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा। यही संकल्प आज उन्हें भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम का उपकप्तान बनाकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले आया है। श्रीलंका दौरे पर अपने बल्ले से तूफान मचाने वाले 17 वर्षीय लक्ष्य अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 18 सितंबर से शुरू होने वाली तीन वनडे और दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला की तैयारी में जुटे हैं। श्रीलंका में उन्होंने एक दोहरा शतक, एक शतक और दो अर्धशतक लगाकर भारतीय क्रिकेट के भविष्य की मजबूत दस्तक दे दी। गोंडा के पूर्व विधायक तुलसीदास रायचंदानी के पौत्र और भाजपा नेता राजेश रायचंदानी के पुत्र लक्ष्य की सफलता केवल क्रिकेट की कहानी नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन और अटूट समर्पण की प्रेरक मिसाल है। आज के दौर में जहां अधिकांश युवा सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने में लगे रहते हैं, वहीं लक्ष्य ने अब तक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना अकाउंट नहीं बनाया। उनका मानना है कि समय सबसे कीमती पूंजी है और उसे केवल क्रिकेट को बेहतर बनाने में लगाना चाहिए। उनका पूरा दिन अभ्यास, फिटनेस, मैच की तैयारी और आत्मविश्लेषण में गुजरता है। यही कारण है कि कम उम्र में भी उनका खेल परिपक्व बल्लेबाज जैसा दिखाई देता है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में लक्ष्य ने बताया कि आठ साल की उम्र में घर छोड़ना आसान फैसला नहीं था। शुरुआत में परिवार की याद बहुत आती थी, लेकिन एक ही सपना था—भारत के लिए खेलना। उसी सपने ने हर मुश्किल को आसान बना दिया। उन्होंने कहा कि हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश करता हूं। अभी मंजिल बहुत दूर है और मुझे भारतीय सीनियर टीम के लिए खेलना है। पिता राजेश रायचंदानी व मां लक्ष्मी रायचंदानी बताती हैं कि बेटे को इतनी छोटी उम्र में घर से दूर भेजना परिवार के लिए बेहद भावुक फैसला था। कई बार मन करता था कि उसे वापस बुला लें, लेकिन उसके सपनों के आगे अपनी भावनाओं को रोक लिया। मां लक्ष्मी रायचंदानी की आंखें आज भी नम हो जाती हैं। वह कहती हैं कि हर मां चाहती है कि उसका बेटा उसके पास रहे, लेकिन देश के लिए खेलने का उसका सपना हमारी सबसे बड़ी खुशी बन गया। जब वह भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतरता है तो सारी दूरियां खत्म हो जाती हैं। श्रीलंका में सफलता के बाद अब लक्ष्य की नजर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है। उनका कहना है कि हर सीरीज नई परीक्षा होती है। पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करनी होती है। टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लक्ष्य का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं रहता।