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VIDEO : गाजीपुर का ये वीडियो गंगा स्वच्छता के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है

गाजीपुर में चार दिवसीय डाला छठ का पर्व शुरू हो गया, लेकिन अभी भी गंगा में नालों का गंदा पानी गिर रहा है। इसके कारण निर्मल गंगा का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। सीवर प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाने के कारण गंगा में नालों के गंदा पानी गिरने पर रोक नहीं लग पा रही है। नगर के विभिन्न गंगा घाटों से कुल 15 नालों का गंदा पानी गंगा में प्रतिदिन गिरता है। इसके कारण स्वच्छ गंगा मुहिम को लगातार झटका लग रहा है। नगर के बड़ा महादेवा, छोटा महादेवा, पत्थर घाट, सिकंदरपुर, ददरीघाट, गोलाघाट, चीतनाथ, रामघाट, अंजनी घाट सहित आदि घाटों से शहर के नालों का गंदा पानी गंगा में प्रवाहित होता है। इससे गंगा में प्रदूषण को बढ़ावा मिलता है। पांच वर्ष पूर्व नगर में 135 करोड़ की लागत से सीवर प्रोजेक्ट का कार्य शुरू हुआ था। सीवर प्रोजेक्ट शुरू होने से लोगों के अंदर उम्मीद जगी कि आने वाले दिनों में नालों का गंदा पानी गंगा में नहीं गिरेगा। सीवर प्रोजेक्ट वर्ष 2022 तक पूरा होने वाला था, लेकिन अभी भी निर्माणाधीन है। हालांकि सीवर प्रोजेक्ट का कार्य अब अंतिम चरण में है। नोडल एजेंसी जलनिगम ग्रामीण का दावा है कि एक-दो महीने में होम कनेक्शन देने का कार्य पूरा होने के बाद नालों का गंदा पानी गंगा में गिरना बंद हो जाएगा। जलनिगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता पीयूष मौर्या ने बताया कि एक-दो महीने में सीवर प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।

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