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भक्त के भाव के भूखे होते हैं भगवान-आचार्य शशिकांत

स्व.वीपी राव मातृ मंदिर सामाजिक सेवा केंद्र सोहनरिया के परिसर में चल रहे श्रीमद्भगवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन सोमवार को वाराणसी से पधारे कथा वाचक आचार्य शशिकांत ने भीष्म स्तुति, राजा परीक्षित के जन्म की कथा, पृथ्वी लोक पर कलियुग का प्रवेश और धर्म की मर्यादा से जुड़ी कथा सुनाई। कथा का रसपान कराते हुए शशिकांत जी महाराज ने कहा कि धर्म की मर्यादा का पालन करना मनुष्य का आभूषण है।

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