चंदौली जिले में रसोई गैस सिलिंडर की किल्लत अब सरकारी स्कूलों में चल रही मिड डे मील योजना पर भारी पड़ने लगी है। हालात ऐसे हैं कि कई विद्यालयों में पिछले 15 से 30 दिनों तक गैस सिलिंडर नहीं मिलने के कारण बच्चों का भोजन लकड़ी, कोयला और पारंपरिक चूल्हों (गोइठा) पर तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि रसोइयों और शिक्षकों को भी अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के सैकड़ों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित इस योजना में गैस की अनियमित आपूर्ति बड़ी समस्या बनकर उभरी है। कई स्कूलों में एक भी सिलिंडर उपलब्ध नहीं है, जबकि कुछ विद्यालयों में सीमित संसाधनों के सहारे काम चलाया जा रहा है। जिले में मिड डे मील योजना बच्चों के पोषण का एक महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में गैस सिलिंडर की किल्लत का लंबा खिंचना व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है। धीना क्षेत्र के बरहनी विकासखंड अंतर्गत कई विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। पिपरी भैंसा गांव में एक सप्ताह से गैस नहीं मिलने के कारण एमडीएम लकड़ी और गोइठा पर बनाया जा रहा है। बेटाडीह, चखनियां, डिग्गी, भैसउर और गोरखा जैसे गांवों के विद्यालयों में भी पिछले कई दिनों से यही स्थिति बनी हुई है। पड़ाव क्षेत्र के चौरहट प्राथमिक विद्यालय में भी करीब 15 दिनों से सिलिंडर नहीं मिला, जिससे भोजन चूल्हे पर बनाना पड़ रहा है।