नगर स्थित काली माता मंदिर से जुड़ी भूमि को लेकर सोमवार को विवाद गहरा गया। मंदिर प्रबंधन की ओर से आरोप लगाया गया कि दान में मिली भूमि पर कब्जे की नीयत से मिट्टी भराई कराई जा रही थी। विरोध होने पर मामला प्रशासन तक पहुंचा, जिसके बाद उपजिलाधिकारी ने दोनों पक्षों को बुलाकर दस्तावेजों की जांच की। विवादित भूमि को लेकर मंदिर पक्ष का दावा है कि वर्ष 2019 में एक मुस्लिम परिवार ने आपसी सहमति से उक्त भूमि मंदिर के नाम दान की थी। मंदिर पक्ष का कहना है कि उसी भूमि पर कब्जा करने की नीयत से मिट्टी भराई कराई जा रही थी, जिसका विरोध किया गया। मामले की सूचना मिलने पर प्रशासन सक्रिय हुआ और सोमवार रात करीब नौ बजे उपजिलाधिकारी ने दोनों पक्षों को कार्यालय बुलाकर उपलब्ध अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच की। इस दौरान दूसरे पक्ष ने प्रशासन के समक्ष यह दावा किया कि वर्ष 2019 में दान दबाव में कराया गया था। हालांकि इस दावे की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है। प्रशासन ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल किसी भी पक्ष के दावे पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध अभिलेखों और कानूनी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि भूमि विवाद को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखें।