फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपकेंद्र पर ताला बंद कर 15 घंटे तक धरने पर बैठे रहे 120 लोग, 89 गांवों में अंधेरा; VIDEO

भीषण उमस, अघोषित बिजली कटौती और रातभर अंधेरे से परेशान बबुरी क्षेत्र के लोगों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। बृहस्पतिवार को दिनभर भीषण उमस के बाद रात 10 बजे जैसे ही पूरे इलाके की बिजली गुल हुई, पहले से आक्रोशित बबुरी, दुदे, लेवा, जरखोर, दिधवट, गौरी, दवक समेत 20 गांवों के 120 से ज्यादा लोग बबुरी विद्युत उपकेंद्र पहुंच गए और मुख्य गेट पर ताला जड़कर धरने पर बैठ गए। “बिजली दो या गद्दी छोड़ो” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। धरना शुक्रवार दोपहर लगभग दो बजे तक चला। मामला शुक्रवार की दोपहर 2 बजे तब शांत हुआ जब अधीक्षण अभियंता जसवीर सिंह ने मौके पर पहुंचकर लिखित आश्वासन दिया। बबुरी उपकेंद्र जिले के महत्वपूर्ण पावर हाउसों में गिना जाता है। यहां से संचालित छह फीडरों के जरिए 89 गांवों को बिजली आपूर्ति होती है। इन गांवों की आबादी लगभग एक लाख से अधिक बताई जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक महीने से रात 10 बजे के बाद नियमित रूप से छह से सात घंटे बिजली काटी जा रही है। दिन में लो वोल्टेज और रात में अंधाधुंध कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। धान रोपाई के पीक सीजन में ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। पेयजल संकट गहराने लगा है। छात्र पढ़ाई नहीं कर पा रहे, जबकि उमस भरी गर्मी में बुजुर्ग और मरीज बेहाल हैं। कई गांवों के लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते रहे, जिससे नाराज होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। आधी रात को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और अधिशासी अभियंता से फोन पर बात कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन अधिकारियों ने ऊपर से लोड शेडिंग के आदेश होने की बात कही। सुबह 10:30 बजे एसडीओ अमर सिंह पटेल धरनास्थल पर पहुंचे। कहा कि ऊपर से ही कटौती के निर्देश हैं और मांग ज्यादा होने के कारण लोकल स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। इस पर ग्रामीण भड़क गए। ग्रामीण नेता श्रीप्रकाश, पप्पू सेठ व अन्य ने कहा कि हर बार यही बहाना बनाया जाता है। जब अपोलो फैक्ट्री को पूरी रात बिजली मिल रही है तो हमें क्यों नहीं।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें