21वीं सदी के दौर में विलुप्त होती पुरानी परंपरा को अचानक से देख कर लोग हक्का बक्का रह गए। शनिवार को गोपीगंज में जब रंग बिरंगे पुष्पों से सजी डोली से एक दुल्हन अपने ससुराल पहुंची, तो हर कोई उसे देखकर दंग रह गया, जब आंख के सामने प्राचीन परंपरा को देखा। तो हर कोई उसे अपने कैमरे में कैद करने के लिए बेताब दिखा। युवा की टोली तो डोली के साथ सेल्फी लेने में व्यस्त रहे। जिधर से डोली गुजर रही थी, उसे देख राहगीर की नजर भी थम सी गई। डोली से दुल्हन के विदा होने की प्राचीन परंपरा लगभग खत्म हो चुकी है। शनिवार को गोपीगंज में डोली में बैठकर विदा हुई दुल्हन को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। सन 1980, 90 के दौर में दुल्हन की विदाई डोली में हुआ करती थी। कहार दुल्हन को डोली में बैठाकर ससुराल ले जाते थे। नगर के पश्चिम मोहाल निवासी सीताराम मौर्या के पूर्व सभासद पुत्र श्रृंगार मौर्या की शादी पड़री में हुई। दुल्हन की विदाई के लिए मेरठ से डोली मंगवाई गई। रंगीन रोशनी और सुगंधित पुष्पों से सजी डोली आकर्षण का केंद्र बन गई। स्वजन और अन्य लोगों ने डोली पर पुष्प वर्षा की। कहार डोली को कंधों पर उठाकर लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर ससुराल तक डोली को पहुंचाए। स्वजन डीजे के धुन पर नाचते गाते रहे। डोली ससुराल पहुंचने पर दुल्हन को देखने की लोगो में उत्सुकता बनी रही। बता दे कि दुल्हन को कम डोली को ज्यादातर लोग निहार रहे थे।