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30 दिन में 25 लाख वापस... साइबर ठगों के खिलाफ बाराबंकी पुलिस का अभियान

'फेसबुक पर दोस्ती करके ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर मेरे आठ लाख रुपये उड़ा दिए गए। मुझे लगा कि मैं टूट गया, अब पैसे वापस नहीं होंगे। लेकिन, मैने 1930 डायल कर आपबीती बताई। उधर से मेरी सारी डिटेल ली गई। कुछ घंटों बाद मेरे पास साइबर सेल की काल आई। बताया गया कि पैसा जिन खातों में ट्रांसफर हुआ है, उनको फ्रीज कर दिया गया है। आखिरकार मेरे पैसे वापस हो गए'। बाराबंकी के पुलिस लाइन सभागार में सोमवार को यह कहते हुए बाल विहार कॉलोनी के कवि विनय शुक्ला बार-बार यही कह रहे थे कि लालच में ना पड़ें, नहीं तो खाता खाली हो जाएगा। यहां विनय अकेले नहीं थे। उनके साथ 13 और लोग भी थे, जिनसे 25 लाख रुपये की ठगी हुई थी। उनको अपनी रकम वापस मिल चुकी है। बाराबंकी पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है। एक महीना पूरी होने पर एसपी अर्पित विजय वर्गीय ने साइबर सेल और पीड़ितों के साथ बैठकर विस्तार से चर्चा की। निचोड़ निकाला कि इस पर कैसे अंकुश लगे। एसपी अर्पित विजयवर्गीय का कहना है कि सबसे बड़ा हथियार ठगों का लालच और डर है। ओटीपी, क्यूआर कोड, लॉटरी, गिफ्ट और बैंक अधिकारी बनकर की जाने वाली बातों में न फंसे। बैंक कभी भी पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगता। यदि कभी ठगी हो जाए तो एक पल भी गंवाए बिना 1930 नंबर डायल करें। ये ठग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक का इस्तेमाल कर रहे हैं, बच्चों के रोते हुए वीडियो बनाकर माता-पिता को धमकाते कर हैं। ऐसे में त्वरित कदम ही बचाव है।

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