सभी बैंकों और डाकघरों में आधार कार्ड बनाने के निर्देश हैं। इसके बावजूद ज्यादातर बैंकों में आधार नहीं बनाए जा रहे हैं। प्रधान डाकघर में दो काउंटर हैं। यहां हर रोज 100 से 120 आधार कार्ड ही बन रहे हैं, जबकि 200 से ज्यादा लोग दूर-दराज से आधार कार्ड बनवाने आते हैं। आधार बनवाने आए लोगों का कहना है कि राशन कार्ड, फार्मर रजिस्ट्री, अपार आईडी सहित अन्य योजनाओं के लिए आधार की जल्दबाजी है। जनपद में आधार कार्ड बनवाने की व्यवस्थाएं सही न होने से छात्र-छात्राओं व अन्य लोगों को हफ्तों भटकना पड़ रहा है। दरअसल पांच साल तक के बच्चे के आधार रेटीना (आंखों) के आधार बनाए गए थे। अब इनका संशोधन किया जाना है। छात्र-छात्राओं को इस समय अपार आईडी में आधार मांगा गया है। इसके अलावा सैकड़ों परिवार ऐसे हैं, जो राशन कार्ड में बच्चों का नाम नहीं जुड़वा पा रहे हैं। किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य की गई है। इसके बिना किसानों को सम्मान निधि व अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे में किसान भी आधार बनवाने और संशोधन के लिए बैंकों तो कभी डाकघरों के चक्कर लगा रहे हैं। शासन ने लोगों के आधार आसानी से बन सके, इसके लिए डाकघरों के साथ बैंकों और कामन सर्विस सेंटरों को भी जिम्मेदारी सौंपी है।