'हम नाविक से कहित रहेन अधेंर होत है, जल्दी चलो भैया। लेकिन हमार बात कोऊ नहीं सुना। अंधेरे मा नाव लइके चले। पानी मा एक बड़ा पेड़ पड़ा रहै। बस नाव पलटि गे। हम तो बचि गएन, हमार पांच साल की नातिन और दो नाती आंखिन के सामने बहि गे।' यह कहते हुए अस्पताल में भर्ती सोनापति का गला रुंध गया। जैसे-जैसे वो नाव हादसे की आंखों देखी बता रही थीं। शब्द जैसे उनके गले से बाहर आने की बजाय अंदर ही धंसते चले जा रहे थे। किसी तरह उन्होंने हादसे के बारे में कुछ जानकारी दी। इसके बाद शांत होकर लेट गईं और नातिन के ना मिलने के गम में डूब गईं। दरअसल, बुधवार की देर शाम बहराइच के ट्रांस गेरुआ क्षेत्र में कौड़ियाला नदी में यात्रियों से भरी एक नाव अनियंत्रित होकर पलट गई। इसमें एक महिला की मौत हो गई। जबकि, 13 लोग तैरकर बाहर निकल आए। मासूम बच्ची कोमल (5) पुत्री पंचम समेत आठ लोग अभी भी लापता हैं। डीएम अक्षय त्रिपाठी गुरुवार को बताया कि एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और एसएसबी की टीमें इनकी तलाश में जुटी हैं। रेस्क्यू अभियान अनवरत जारी है। लापता लोगों में भरथापुर निवासी दो नाव चालक मिहीलाल (40) पुत्र पुतई, शिवनंदन (50) पुत्र शालिक राम, कोमल (5) पुत्री पंचम निवासी मटेरा के दाड़े पुरवा, सुमन देवी (28) पत्नी प्रमोद, इनकी बेटी सुहानी (5) पुत्री प्रमोद, निवासी भरतपुर, ओमप्रकाश (30), इसका छोटा भाई मीनू (5) पुत्रगण घनश्याम, निवासी गिलौला, श्रावस्ती, और शिवम (11) पुत्र रामनरेश शामिल हैं।