सोनीपत के कबीरपुर गांव की सोनिया गुप्ता और सूरज राजपूत का रिश्ता समाज और परिवार की बंदिशों के सामने खड़ा था। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन लव मैरिज के सख्त खिलाफ थे, दोनों के घरवाले। दोनों नीलकंठ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने सच्चे मन से मन्नत मांगी। नीलकंठ से लौटने के कुछ ही दिन बाद दोनों के परिवारों ने शादी करा दी। शादी के बाद बच्चा नहीं हो रहा था, तो फिर से नीलकंठ पहुंचे। वहां से लौटते ही उनकी एक प्यारी सी बेटी मीरा का जन्म हो गया। सोनिया चार सालों से अपनी मां कलावती और ननद बिंदु के साथ कांवड़ ला रही हैं।