अयोध्या। भरत की तपोस्थली नंदीग्राम भरतकुंड में दो दिवसीय ऐतिहासिक व पौराणिक पिशाची मेले का शुभारंभ बुधवार को हुआ। हर वर्ष चैत्र कृष्ण चतुर्दशी पर लगने वाला यह मेला अपनी विशेष धार्मिक मान्यता के कारण बेहद प्रसिद्ध है। मान्यता है कि न सौ काशी, न एक पिशाची, यानी काशी में सौ बार स्नान से जो पुण्य मिलता है, वह पिशाच मोचन कुंड में एक बार स्नान करने से प्राप्त होता है। इसी आस्था के चलते देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर कुंड में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। भरत कुंड महोत्सव न्यास के अध्यक्ष डॉ. अंजनी पांडेय ने बताया कि यह स्थल त्याग और समर्पण की भावना का प्रतीक है। वहीं महंत परमात्मा दास ने कहा कि कुंड में स्नान से समस्त पिशाच बाधाओं से मुक्ति मिलती है। मेले में दुकानदारों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से बैरियर, भीड़ नियंत्रण और खोया-पाया केंद्र की भी व्यवस्था की गई है।