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VIDEO: अयोध्या पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, राम मंदिर ट्रस्ट, आरएसएस और सरकार पर साधा निशाना

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपनी गविष्टि यात्रा के तहत शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे। बीकापुर विधानसभा क्षेत्र के जलालपुर पिपरी मोड़ पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में उन्होंने गौ संरक्षण के मुद्दे पर जनता से समर्थन मांगा और कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य लोगों से सीधे संवाद कर गौमाता की रक्षा के मुद्दे पर मतदान के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा देश की सभी विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए निकाली गई है और अब तक 375 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में जनसंवाद किया जा चुका है। उनका दावा था कि बड़ी संख्या में लोगों ने गौ संरक्षण के लिए मतदान का संकल्प लिया है। पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने राम मंदिर ट्रस्ट, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्र व प्रदेश सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के संचालन में ऐसे लोगों की भूमिका नहीं होनी चाहिए जो भगवान राम को भगवान के रूप में नहीं मानते। उनका कहना था कि मंदिर का संचालन श्रद्धा और आस्था रखने वाले लोगों के हाथों में होना चाहिए। राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और कहा कि यदि कोष में गड़बड़ी हुई है तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी उन्होंने सवाल उठाए, जिसमें हनुमानगढ़ी से जुड़ा विवादित उल्लेख किया गया था। शंकराचार्य ने कहा कि इस तरह के दावों का कोई ऐतिहासिक आधार नहीं है और सरकार को राम मंदिर से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में पहले किए गए वादों पर जवाब देना चाहिए। भाजपा द्वारा उन पर राजनीति करने के आरोपों के जवाब में उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण के लिए आवाज उठाना राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदान हर नागरिक का अधिकार और जिम्मेदारी है। राम मंदिर परिसर में कथित चोरी और गिरफ्तार किए गए आरोपियों के संबंध में उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनका दावा था कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले परिसर में किसी भी बड़ी घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि अदालत में मुकदमे की पैरवी संत समाज ने की थी और बाद में अन्य संगठनों ने उसका राजनीतिक लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का संचालन धर्म और आस्था के आधार पर होना चाहिए। 22 जुलाई को प्रस्तावित राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि संबंधित संस्थाएं अपने स्तर पर निर्णय ले रही हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल के नहीं बल्कि पूरे हिंदू समाज के मार्गदर्शक हैं।

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