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23 दिनों में 84 कोस की परिक्रमा पूरी कर अयोध्या वापस लौटे संत और श्रद्धालु

भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 04 May 2025 12:49 PM IST

रामनगरी अयोध्या से 12 अप्रैल को निकली 84 कोसी परिक्रमा रविवार को 23वें दिन परिक्रमा पूरी करके वापस अयोध्या पहुंची। यहां पर हजारों की संख्या में साधु-संतों ने राम मंदिर की शास्त्रीय सीमा रामकोट की परिक्रमा कर 84 कोस की परिक्रमा पूरी की। 12 अप्रैल को अयोध्या से विश्व हिंदू परिषद के हनुमान मंडल दल के नेतृत्व में निकली परिक्रमा शोभायात्रा 13 अप्रैल को मखौड़ा धाम से शुरू हुई थी। पांच जिलों में होते हुए लगभग 265 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी कर संत और श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। यहां 84 कोस के परिक्रमार्थियों का भव्य स्वागत हुआ। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने रामकोट की परिक्रमा कर 84 कोस की परिक्रमा पूरी की। पूरे भारत से अलग-अलग जगहों के अलावा नेपाल से भी श्रद्धालु 84 कोस की परिक्रमा में शामिल हुए। अयोध्या पहुंचे श्रद्धालु 84 कोस की परिक्रमा में की गई व्यवस्थाओं को लेकर विश्व हिंदू परिषद और पांचों जिलों के प्रशासन को धन्यवाद दिया। व्यवस्थाएं बहुत ही माकूल रहीं। श्रद्धालुओं ने कहा कि हमें तो पता ही नहीं लगा कि हमने कब परिक्रमा शुरू की और कब परिक्रमा खत्म कर दी। इस बार काफी बेहतर तरीके की व्यवस्थाएं दी गई थीं। जगह-जगह तमाम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहीं और बहुत ही अच्छे से हमने भगवान के नाम का संकीर्तन करते हुए परिक्रमा की। विश्व हिंदू परिषद के हनुमान मंडल दल के अध्यक्ष और 84 कोस की परिक्रमा के आयोजक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हम श्रद्धालुओं के साथ 12 अप्रैल को अयोध्या से निकले थे। मखौड़ा धाम से 13 अप्रैल को परिक्रमा शुरू की। 22 दिन लगातार चलने के बाद 23वें दिन आज हम अयोध्या पहुंचे हैं। इस दौरान हमें जगह-जगह बेहतर व्यवस्थाएं मिलीं। पांचों जिलों में लोगों ने पलक पावड़े बिछा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। मन बहुत प्रसन्न है। आस्था के पथ पर चलते हुए धर्मपथ पर हम लोगों ने लगभग 265 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी की है। अयोध्या में अब हम राम मंदिर की परिक्रमा कर रहे हैं और इसी के साथ ही 84 कोस की परिक्रमा पूरी हो गई।

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