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VIDEO: वर्मी कंपोस्ट और पशुपालन से तरक्की की राह पर मातृशक्ति, गांव में आमदनी के बेहतर सोर्स डेवलप कर रहीं महिलाएं

महिलाएं पशुपालन, डेयरी, ऑर्गेनिक खेती व वर्मी कंपोस्ट बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं इस कार्य से अच्छी कमाई कर रही हैं। साथ ही इस कार्य से दूसरी महिलाओं को भी जोड़ रही हैं। हौसले बुलंद हों तो मंजिल पाना बहुत कठिन नहीं होता। ऐसा ही ब्लॉक शाहगढ़ के जय मां पार्वती स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कर दिखाया है। वे घर की दहलीज से निकलकर आज महानगरों में अपना नाम कमा रही हैं। समूह की अध्यक्ष निर्मला देवी आज महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में स्वर्ण जयंती योजना के माध्यम से वह समूह से जुड़ीं। समूह में कोषाध्यक्ष कृष्णा देवी, सचिव गायत्री के अलावा रामरता, विमला, बीना, पार्वती, इंद्रकला, सुधा और विद्या शामिल हैं। समूह की सभी महिलाएं निर्मला से प्रेरित होकर पशुपालन कर रही हैं। वर्मी कंपोस्ट और पशुपालन से 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी प्रतिमाह कर रही हैं। 60 हजार से अधिक कर रहीं आमदनी समूह अध्यक्ष निर्मला देवी की गोशाला में शाहीवाल और फिजियन प्रजाति की 40 से अधिक गायें हैं। इसके अलावा वह भैंस पालन भी कर रही हैं। प्रतिदिन इनसे दो क्विंटल से अधिक दूध उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा तीन बीघे में मोटे अनाज की ऑर्गेनिक खेती भी कर रही हैं। दुग्ध व्यवसाय से करीब 60 हजार रुपये की कमाई प्रतिमाह हो रही है। वहीं ऑर्गेनिक खेती से हर सीजन 50 से 60 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। लखनऊ सहित अन्य जनपदों में हो रही बिक्री वर्मी कंपोस्ट खाद की बिक्री निर्मला देवी स्थानीय बाजार के साथ ही लखनऊ, सुलतानपुर, रायबरेली और अयोध्या में कर रही हैं। उन्होंने बताया कि मेरठ से केंचुए मंगाकर इसकी शुरुआत 15 साल पहले की थी। अब वह 20 रुपये प्रति किलो खाद के साथ 310 रुपये प्रति किलो केंचुआ भी बेच रही हैं। साल भर में चार टन से अधिक वर्मी कंपोस्ट और 50 क्विंटल से अधिक केंचुओं की बिक्री हो जाती है। महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की कवायद समूह अध्यक्ष निर्मला देवी सीएलएफ संगठन की उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि सीएलएफ में 13 ग्राम संगठन हैं। एक ग्राम संगठन में पांच से छह समूह होते हैं। इस तरह करीब 800 महिलाएं समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि कई संगठनों की महिलाएं आज पशुपालन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसके अलावा समूह की महिलाओं को अगरबत्ती, मोमबत्ती, धूपबत्ती, मसाला, डेयरी, पशुपालन, पत्तल-दोना और चप्पल बनाने के कारोबार से जोड़ने की कवायद की जा रही है। इसकी तैयारी भी चल रही है।

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