मध्य प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की जमीन को धोखाधड़ी कर बेच दिया गया। खरीदारों ने नींव डालने के लिए खोदाई शुरू की तो केयरटेकर ने पूर्व मुख्यमंत्री के साथ डीएम, एसडीएम व पुलिस शिकायत की। जिला प्रशासन ने काम रुकवाकर जमीन से जुड़े दस्तावेज की जांच शुरू कर दी है। आलापुर तहसील क्षेत्र के रामनगर महुवर गांव के गाटा संख्या 1235 क क्षेत्रफल 0.152 हेक्टेयर दिग्विजय सिंह के नाम दर्ज है। पूर्व में जमीन उनकी मां के नाम दर्ज थी। 18 फरवरी 1986 को मां के निधन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वरासत के लिए आवेदन किया। 18 मई 2024 को जमीन इनके नाम ने दर्ज हो गई। जमीन की वर्तमान कीमत 50 लाख के करीब है। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने जमीन का अधिकार पत्र मकरही रियासत के नृपेंद्र शाह के नाम जारी कर दिया। हालांकि अभी अधिकार पत्र को अभिलेख में दर्ज नहीं किया जा सका है। शुक्रवार को उसी जमीन पर कुछ लोगों ने निर्माण कराने के लिए नींव खुदवानी शुरू कर दी। इस पर केयरटेकर रामनगर के ग्राम महुआ निवासी अनिल कुमार यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री को जानकारी दी। अनिल के अनुसार हंसवर के ग्राम क्वेटला निवासी रामहरक चौहान ने वर्ष 1989 में मुख्तार-ए-आम दिग्विजय सिंह बनकर जमीन को जियालाल, राजबहादुर पुत्रगण शिव प्रसाद व मंगली पुत्र मद्धू निवासी रामनगर महुवर के नाम बैनामा कर दिया था। अब खरीदारों ने जमीन पर निर्माण कराने की कोशिश की है। आलापुर के एसडीएम सुभाष सिंह का कहना है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री की जमीन पर कब्जे का मामला संज्ञान में आया है। लेखपाल से जमीन का ब्योरा निकलवाकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसमें जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगा।