भावनाओं पर काबू रखकर नए शरीर के साथ सीखा जीना। डॉ. दीपा मलिक भारत की पहली महिला पैरा एथलीट हैं जिन्होंने पैरालंपिक में पदक हासिल किया था। डॉ. दीपा मलिक सोमवार को प्रयागराज पहुंचीं। उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए अपने संघर्षों और सफलता के बारे में विस्तार से बताया। दीपा मलिक ने कहा कि समाज की सोच ने जितनी अपंगता दी उतनी शायद शरीर ने खुद को नहीं दी। कहा कि अपनी भावनाओं पर काबू रखते हुए नए शरीर के साथ जीना सीखा। 30 साल की उम्र में छाती के नीचे का पूरा शरीर लकवाग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।