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VIDEO : Navratri : शक्तिपीठ कड़ाधाम में भक्तों का लगा तांता, मां शीतला का भक्तों के किया दर्शन, गूंजे जयकारे

विनोद सिंह Updated Thu, 03 Oct 2024 04:53 PM IST

शीतला धाम कड़ापीठ सैकड़ों वर्षों से शक्ति उपासकों का केंद्र रहा है। स्कंद पुराण के अनुसार भगवान शिव की पत्नी सती ने पिता दक्ष के अपमान से आहत होकर यज्ञ कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए। उनके वियोग में क्रोधित भगवान शिव सती का मृत शरीर लेकर समस्त लोकों में भ्रमण करने लगे। शिव के क्रोध से बचने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के मृत शरीर को 51 टुकड़ों में काट दिया। जहां-जहां सती के मृत शरीर के ये टुकड़े गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ की स्थापना हुई। कड़ा धाम वह स्थान है जहां सती का हाथ या चूड़ी (कड़ा) या हाथ गिरा था। पहले इसको कर धाम फिर अपभ्रंश होकर कड़ाधाम कहा जाने लगा। माना जाता है कि द्वापर युग में पांडु पुत्र युधिष्ठिर अपने वनवास के दौरान इस मंदिर में दर्शन करने आए थे। उन्होंने गंगा तट पर शीतला देवी का मंदिर बनवाया। यहां चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को देवी शीतला की पूजा करने से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1000 में हुआ था। यहां माता शीतला देवी का स्थान है। इन्हें पूर्वांचल की कुलदेवी कहा जाता है , जिसके चलते यहां 12 महीने पूर्वांचल के सभी जिलों से श्रद्धालु भारी संख्या में आते हैं।

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