जैन धर्म के संतों ने कहा कि क्षमा धर्म विश्व शांति का प्रबल मंत्र है। क्रोध न करना ही क्षमा का दूसरा नाम है। क्षमा मांगने की नहीं स्वयं के अंदर उतारने की आवश्यकता है। जैसे रूप का आभूषण गुण है और गुण का आभूषण ज्ञान है। उसी तरह ज्ञान का आभूषण क्षमा है। क्षमा से विश्वव्यापी समस्याओं का समाधान हो सकता है।