इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संविधान की मूल प्रति में पंथनिरपेक्ष और समाजवाद जैसा कोई शब्द नहीं है। यह दो शब्द तब जोड़े गए जब संसद भंग थी और न्यायपालिका के अधिकार कुंद कर दिए गए थे। जिन लोगों ने संविधान का गला घोंटने का काम किया था, वह आज संविधान बचाने का ढिंढोरा पीट रहे हैं। प्रश्न यह उठता है कि यह समाज उन लोगों का मूल्यांकन कब करेगा, जो लोकतंत्र के लिए स्वयं एक खतरा है। इन्होंने संविधान में स्वयं अपनी मर्जी से छेड़छाड़ करने का क कुत्सित प्रयास करने के साथ लोकतंत्र को पैरालाइज करने का प्रयास भी किया है। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी के नाम पर परिवारवाद की चाटुकारिता करने वाले यह बताएं कि क्या एक परिवार की चाटुकारिता ही समाजवादी आंदोलन है। उन्होंने छात्र संघ के मुद्दे पर कहा कि छात्र संघ चुनाव में शिरकत करने के लिए अधिकतम आयु निर्धारित होनी चाहिए। सीधे तौर पर पर ना सही लेकिन उन्होंने विश्वविद्यालय में छात्र संघ बहाली की वकालत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंच पर आठ मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए। साथ ही कवि कुमार विश्वास को मानव उपाधि प्रदान की।