चायल तहसील के दरहा गांव में बृहस्पतिवार रात आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवा के कारण तैयार केले की फसल खेतों में गिरकर जमींदोज हो गई। वहीं, खेतों में पानी भरने से नुकसान और बढ़ गया। किसान अब प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। दरहा गांव निवासी चंद्रभान सिंह ने बताया कि उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से ऋण लेकर 16 बीघा में केले की खेती की थी। फसल तैयार होने वाली थी, लेकिन आंधी-पानी में केला बर्बाद हो गया। केले के पेड़ कांदी समेत जमीन पर गिर गए हैं। इसी तरह विजय सिंह की चार बीघा, जयनारायन सिंह की चार बीघा, नन्हू सिंह की तीन बीघा, मोहन सिंह, रंजीत सिंह, लवकुश सिंह, टीपू सिंह, रामबाबू सिंह, त्रिभुवन सिंह और पप्पू सिंह की दो-दो बीघा केले की फसल प्रभावित हुई है। अनिल, मुकेश, हरिमोहन समेत कई किसानों की एक-एक बीघा फसल भी तेज आंधी में नष्ट हो गई। किसानों का कहना है कि एक बीघे में एक हजार केले के पौधे लगते हैं। टीशू कल्चर पौधा 16 से 18 रुपये प्रति पौधा मिलता है। वहीं, एक बीघे में आठ से 10 ट्राली कंपोस्ट खाद, डीएपी, यूरिया सहित कई प्रकार की खाद डाली जाती है। फूल निकलने पर रोग से बचाने के लिए हर सप्ताह दवा का छिड़काव और डिंचिंग करना पड़ता है। ऐसे में प्रति बीघा करीब एक लाख रुपये लागत अधिक आती है और अधिकांश किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी। अचानक आई प्राकृतिक आपदा से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है।